Monday, October 12, 2015

इंदौर डायरी - 16

आदतन वह आज भी ऑनलाइन था फेसबुक पर। रात के लगभग 9:12 बजे थे और तभी उसके मैसेज बॉक्स में लिखा आया, 'हैलो।' यह उसी का मैसेज था जिसने बीती रात यह कहा था कि आपके साथ टाइमपास करने के लिए ही चैट कर रही हूं और उसने उसे बाय बोल दिया था। उसने दो मिनट तक कोई जवाब नहीं दिया उस मैसेज का। इस दौरान वह सोचता रहा कि बात शुरू की जाए या नहीं। आखिरकार उसने जवाब दिया, 'हैलो, कैसी हो?' दूसरी तरफ से झट से जवाब आया, 'अच्छी हूं, तुम कैसे हो? मेरे सच बोलने से गुस्सा क्यों हो गए थे कल?' उसने जवाब दिया, 'हां, लेकिन अब नहीं हूं, क्योंकि तुमने कम से कम सच तो बोला।' जवाब में लिखा आया, थैंक्यू, बाद में बात करती हूं। आज मुझे नींद आ रही है। गुड नाइट। बाय।' एक बार फिर उस अनजान से बात शुरू होने के बाद वह बहुत खुश था।
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 16

Thursday, October 8, 2015

इंदौर डायरी - 15

रात के 10:02 बजे फेसबुक पर उसके मैसेज बॉक्स में नोटिफिकेशन दिखने लगा। उसने देखा तो पता चला कि मैसेज उसी का है, जिसने बीती रात उससे बात करने की बात कही थी। उसने हैलो लिखा था। उसने भी जवाब में हैलो लिख दिया। फिर मैसेज आया, 'आप क्या हर किसी से बात कर लेते हो?' उसने जवाब दिया, 'अभी तक तो किसी ने बात नहीं की। हां, तुमने जरूर मेरे मैसेज का जवाब दिया।' उधर से लिखा आया, 'ओहोहोहो।' उसने लिखा, 'तुम्हारी दीदी चली गई?' दूसरी तरफ से मैसेज आया, 'हां, दीदी चली गई है और मैं अपने कमरे में अकेले बोर हो रही हूं इसलिए फेसबुक पर आपसे चैट कर रही हूं।' उसने लिखा, 'हम्म्म्म। तुम केवल अपनी बोरियत दूर करने के लिए मुझसे बात कर रही हो?' दूसरी तरफ से लिखा आया, 'मैं झूठ नहीं बोलूंगी और मेरा जवाब हां में ही है। यदि आपको पसंद नहीं तो मैं बात नहीं करूंगी।' उसने लिखा, 'ओके, बाय।'
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 15

Wednesday, October 7, 2015

इंदौर डायरी - 14

फेसबुक पर वह अकसर अनजान लोगों को मैसेज भेजा करता था, लेकिन उनमें से किसी का भी जवाब किसी ने नहीं दिया था। उस दिन उसने तय किया था कि वह अंतिम बार किसी अनजान शख्स को मैसेज भेजेगा और इसका कोई जवाब नहीं आया तो ऐसा करना बंद कर देगा। उसने शाम के 5:21 बजे एक अनजान शख्स को मैसेज भेजा। काफी देर तक कोई जवाब नहीं आया तो उसने सोच ही लिया था कि अब से यह सब बंद। रात के 10:46 बजे दूसरी तरफ से मैसेज आया, 'हैलो।' इसके बाद उसने पूछा, 'कैसी हो?' उधर से जवाब आया, 'मैं बढ़िया हूं, आप कैसे हैं?' इसके बाद उधर से मैसेज आया, 'आप कल रात में भी ऑनलाइन रहेंगे क्या?' उसने जवाब दिया, 'हां, मैं तो अकसर ही रात में ऑनलाइन रहता हूं।' फिर उधर से चैट बॉक्स में लिखा आया, 'तो फिर आपसे कल बात करती हूं, अभी मेरी दीदी आई हुई हैं। कल वो चली जाएंगी तो मैं भी फ्री रहूंगी। टाइमपास के लिए आपसे बात कर लूंगी। बाय। गुड नाइट। स्वीट ड्रीम्स।' 
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 14

Monday, October 5, 2015

इंदौर डायरी - 13

वह ऑफिस से लौटा ही था कि उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। उसने कॉल रिसीव किया तब पता चला कि दूसरी तरफ बचपन की एक मित्र है, जिसके साथ उसकी स्कूलिंग हुई थी। उसने उसका हालचाल पूछा। साथ ही एक सवाल जो अकसर उससे उसे जानने वाले किया ही करते थे, 'शादी कब कर रहे हो?' उसने सवाल को टालते हुए कहा, आजकल कहां हो? उसने बताया वह चेन्नई में है क्योंकि उसके पतिदेव की नौकरी वहीं है। उसके बाद उसके सुख-दुख के किस्से शुरू हो गए। लेकिन, उसने दोबारा अपना सवाल दोहराया, तुमने बताया नहीं कि शादी कब कर रहे हो? उसने एक लंबी सांस लेकर कहा, जब होनी होगी, हो जाएगी। मित्र ने कहा, ऐसा क्यों बोल रहे हो, क्या हुआ है। तुम चाहो तो मुझे सारी बात बता सकते हो। हो सकता है तुम्हारे दिल का बोझ कुछ हल्का हो जाए। आंखों में आंसू लिए हुए रूंधे गले से उसने उसे शुरू से लेकर उस दिन की सारी बात बयां कर दी।

Sunday, October 4, 2015

इंदौर डायरी - 12

आज सुबह से ही उसका मन उदास था। रह-रह कर उसे कुछ अंदर से साल रहा था। क्या, उसे पता तो था लेकिन शायद वह जमाने के सामने जाहिर नहीं करना चाहता था। उसने बहुत सोचने के बाद मोबाइल उठाया और सर्च ऑप्शन में टाइप करने लगा। स्क्रीन पर उसका नाम चमकने लगा था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि कॉल बटन को क्लिक कर पाए। तभी अचानक मोबाइल पर दिखने लगा ..... कॉलिंग। उसके लिए अजीब स्थिति हो गई। सोचने लगा कॉल रिसीव करूं या काट दूं। इस बीच मोबाइल की घंटी आठ-नौ बार बज चुकी थी। जैसे ही दसवीं घंटी बजी उसने कॉल रिसीव कर लिया। उधर से आवाज आई, 'कैसे हो?' उसने जवाब दिया, 'ठीक हूं।' उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन, उसने फिर भी यह बोला था। उधर से आवाज आई, 'एक बात पूछुंगी तो बताओगे।' उसने कहा, 'हां, पूछो ना। क्या पूछना है।' 'तुम शादी क्यों नहीं कर रहे हो? मेरे लिए कब तक इंतजार करोगे? तुम्हारे चक्कर में घरवाले मुझे भला-बुरा बोल रहे होंगे।' इसके साथ ही उधर से रोने की आवाज आने लगी और अगले ही पल कॉल काट दिया गया। वह यही सोच रहा था कि आज भी मैं उसके सवाल का जवाब नहीं दे सका।
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 12

Friday, October 2, 2015

इंदौर डायरी - 11

वह बहुत खुश था। आज उसका बर्थडे था और इस खास मौके को सेलिब्रेट करने के लिए वह दिल्ली आया था। दिल्ली में उसने अपने एक दोस्त के यहां अपना सामान पटका और जल्दी से तैयार होकर निकल पड़ा। दोस्त ने पूछा खाना नहीं खाएगा क्या, तो उसका जवाब था- यार लेट हो जाउंगा तो मैडम नाराज हो जाएंगी। मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने में लगने वाला समय बचाने के लिए उसने रिक्शा कर लिया जिसने वहां के लिए किराया मांगा- 30 रुपये। रिक्शेवाला ज्यादा मांग रहा था लेकिन उससे मिलने की जल्दी में उसने बहस नहीं किया और फौरन बैठ गया और उसे जल्दी से जल्दी स्टेशन पहुंचाने के लिए कहा। मेट्रो स्टेशन पहुंच कर ट्रेन पकड़ी और अपने गंतव्य राजीव चौक पहुंचा। वहां वह तय समय से 20 मिनट पहले ही पहुंच गया था। अब वह स्टेशन पर ही आते-जाते लोगों को देखते हुए इंतजार करने लगा। वह आई तो उसने अपनी बांहें फैलाईं और उसने भी बर्थडे विश करते हुए कहा, 'हैप्पी बर्थडे ...।' तभी अचानक कुछ लोग आए और उसे खींचकर उससे दूर ले जाने लगे। उसे धक्का लगा और वह गिर पड़ा। उसकी नींद टूट गई थी और वह एक बार फिर से तन्हा था।
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 11

Thursday, October 1, 2015

इंदौर डायरी - 10

वह सुबह से ही बहुत उदास था। उसके मन में रह रह कर बुरे ख्याल आ रहे थे। फिर भी वह अपने मन को किसी तरह समझा रहा था। मंदिर नहीं जाने के बाद भी भगवान से यही मना रहा था कि कुछ बुरा सुनने को ना मिले आज। रात के लगभग 11:30 बजे तक कोई बुरी खबर नहीं मिली तो उसे लगा कि भगवान ने उसकी प्रार्थना मान ली है। तभी 11:38 पर उसका मोबाइल बजा और उसने देखा कि यह तो उसी का फोन है। उसने थरथराते हाथों से कॉल रिसीव किया। दूसरी तरफ से रोने की आवाज आने लगी। उसने उसे चुप होने के लिए कहा, लेकिन दूसरी तरफ से लगातार रोने की आवाज आती रही। 
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Tuesday, September 29, 2015

इंदौर डायरी - 9

वह सुबह 6:30 बजे नींद से जागा ही था। उसने अपना मोबाइल देखा। उसमें एक अनजान नंबर से मैसेज आया हुआ था 'आई मिस यू।' उसने देखा औऱ सोच में पड़ गया कि आखिर यह मैसेज भेजा किसने होगा। उसने पलटकर उस नंबर पर रिंग किया। दूसरी तरफ से फोन उठा, लेकिन कोई आवाज नहीं आ रही थी, सिवाय कमरे में चल रहे पंखे के अलावा। उसने कई बार हैलो-हैलो किया, लेकिन फिर भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बावजूद भी उसने फोन नहीं काटा और उस सन्नाटे को सुनता रहा। आखिरकार 6:37 मिनट में दूसरी तरफ से फोन काट दिया गया और वह एक बार फिर अकेला रह गया अपने कमरे में। 
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 9

Monday, September 28, 2015

इंदौर डायरी - 8

देर शाम हो चुकी थी। कमरे के बाहर तेज बारिश की आवाज उसके कानों में पड़ रही थी, लेकिन मन में चार साल पहले का दृश्य घूम रहा था और आंखों के कोनों से आंसू टपकने ही वाले थे। तभी उसने कमरे का दरवाजा खोला और बाहर हो रही बारिश में खुद को भिंगोने लगा। इस बारिश के पानी में उसके आंसू भी घुल गए। उसके बाजू के कमरे में रहने वाले लड़के ने पूछा, भैया आपको भी बारिश में भींगना अच्छा लगता है क्या? उसने उसके सवाल को टालते हुए कहा, बारिश का मजा लो।
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Sunday, September 27, 2015

इंदौर डायरी - 7

बहुत याद आ रही थी वो। उसने इस कारण ही उसको सुबह के 10 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक ढेरों व्हाट्सऐप मैसेज कर दिए, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। आंखों में आंसू के साथ वह बिस्तर पर लेटा हुआ था। नींद आंखों से कोसों दूर थी। अचानक रात के 1.35 बजे उसके मोबाइल पर एक व्हाट्सऐप मैसेज आया। मैसेज पढ़कर उसने अपना मुंह तकिये में दबा लिया ताकि रोने की आवाज कमरे से बाहर न जाए।
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Friday, September 25, 2015

इंदौर डायरी - 6

आज फिर उसका मोबाइल शांत पड़ा था। कोई मैसेज या कॉल नहीं। अचानक रात के 10 बजे उसका मोबाइल घनघनाया। उसने देखा तो एक अनजान नंबर से कॉल था। उसने कॉल नहीं उठाने का फैसला किया और सोचा गलत नंबर होगा और दो-तीन बार बजकर बंद हो जाएगा। लेकिन, वह लगातार 10-12 बार बजकर बंद हुआ और फिर से बजने लगा। अंततः उसने थक-हारकर कॉल रिसीव किया। उधर से किसी के रोने की आवाज आ रही थी। उसे समझते देर नहीं लगी कि कॉल किसका था।
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Thursday, September 24, 2015

इंदौर डायरी - 5

तीन दिन बाद उसके मोबाइल पर एक नोटिफिकेशन वाला रिंगटोन बजा। उसने अनमने ढंग से देखने के लिए मोबाइल उठाया। देखते ही उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जिस कारण वह बीते दिनों उदास था, वह दूर हो गया था। उसकी बर्थडे विश का उसने जवाब दिया था - थैक्स। साथ ही उसका हालचाल भी पूछा था। इतना काफी था उसके खुश होने के लिए। 
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Wednesday, September 23, 2015

इंदौर डायरी - 4

आज 'उसका' बर्थडे था। उसने उसे व्हाट्सऐप, फेसबुक और अन्य सोशल साइट्स पर बर्थडे की बधाई भी भेज दी थी, लेकिन फिर भी वह खुश नहीं था। कारण यह था कि वह उससे खुद फोन पर विश नहीं कर रहा था। सबकुछ आभासी दुनिया में कर रहा था, वह उसे खुद से विश करना चाहता था और उसका रिएक्शन जानना चाहता था।
‪#‎इंदौरडायरी‬ 4

Tuesday, September 22, 2015

इंदौर डायरी-3

आज उसके ऑफिस की छुट्टी थी। वह बाहर जाकर घूमने का प्लान बना ही रहा था कि अचानक उसके मोबाइल में नोटिफिकेशन वाली आवाज गूंजी। उसने देखा कि उसके फेसबुक पेज पर चार दिन पहले लिखे गए एक पोस्ट को उसने लाइक किया है। उसने बाहर जाने का प्लान बनाना छोड़ दिया और अपने मोबाइल को हर दस मिनट बाद चेक करने लगा।
‪#‎इंदौरडायरी‬ 3

Monday, September 21, 2015

इंदौर डायरी‬-2

रात में अचानक वह उठकर बिस्तर पर बैठ गया। उसे लगा जैसे सिरहाने में पडा उसका मोबाइल फोन घनघना रहा है। उसने देखा, लेकिन उसकी लाइट नहीं जल रही थी। फिर भी उसने मोबाइल की कॉल लिस्ट देखी कि कहीं मिस्ड कॉल में उसका नंबर तो नहीं है। आखिर उसकी आदत जो थी देर रात में उससे बात करने की।
#‎इंदौरडायरी‬-2

Sunday, September 20, 2015

‪इंदौर डायरी‬-1

वह अंदर अपने कमरे में बिस्तर पर लेटा हुआ था। बाहर अचानक जोरों की बारिश होने लगी। उसके कमरे में कोई खिड़की नहीं थी, लेकिन फिर भी उसे पता चल चुका था कि बाहर बारिश हो रही है। इसका पता उसे छत पर लगे टीनशेड पर पड़ने वाली बारिश की बूंदों के चोट से होने वाली आवाज से चल रहा था। अंदर ही अंदर वह सोच रहा था काश कोई उसके दिल में लगातार चोट कर रही बातों का हाल जान पाता।
‪#‎इंदौरडायरी‬-1