Wednesday, October 7, 2015

इंदौर डायरी - 14

फेसबुक पर वह अकसर अनजान लोगों को मैसेज भेजा करता था, लेकिन उनमें से किसी का भी जवाब किसी ने नहीं दिया था। उस दिन उसने तय किया था कि वह अंतिम बार किसी अनजान शख्स को मैसेज भेजेगा और इसका कोई जवाब नहीं आया तो ऐसा करना बंद कर देगा। उसने शाम के 5:21 बजे एक अनजान शख्स को मैसेज भेजा। काफी देर तक कोई जवाब नहीं आया तो उसने सोच ही लिया था कि अब से यह सब बंद। रात के 10:46 बजे दूसरी तरफ से मैसेज आया, 'हैलो।' इसके बाद उसने पूछा, 'कैसी हो?' उधर से जवाब आया, 'मैं बढ़िया हूं, आप कैसे हैं?' इसके बाद उधर से मैसेज आया, 'आप कल रात में भी ऑनलाइन रहेंगे क्या?' उसने जवाब दिया, 'हां, मैं तो अकसर ही रात में ऑनलाइन रहता हूं।' फिर उधर से चैट बॉक्स में लिखा आया, 'तो फिर आपसे कल बात करती हूं, अभी मेरी दीदी आई हुई हैं। कल वो चली जाएंगी तो मैं भी फ्री रहूंगी। टाइमपास के लिए आपसे बात कर लूंगी। बाय। गुड नाइट। स्वीट ड्रीम्स।' 
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 14

No comments: