देश में खोजी पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले नामी पत्रकार तरुणजीत तेजपाल खुद भी स्टिंग ऑपरेशन का शिकार हो गए हैं। वे अपना पद छोड़ने से पहले तहलका पत्रिका के संपादक थे। तेजपाल पर अपनी ही एक साथी महिला पत्रकार के यौन उत्पीड़न का आरोप है और इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। जहां यह घटना घटी है, वहां की गोआ सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। एडीटर्स गिल्ड ने भी इस मामले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है।
कौन हैं तरुण तेजपाल
तरुण तेजपाल ने पंजाब से स्नातक की डिग्री लेने के बाद दिल्ली में इंडिया टुडे मैगजीन से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस अखबार और बाद में आउटलुक के प्रबंध संपादक भी रहे। तेजपाल ने दो उपन्यास भी लिखे हैं। उम्र के पांच दशक पूरे कर चुके तरुण का पत्रकारिता में करीब 28 साल का करियर है।
मार्च 2000 में आउटलुक के प्रबंध सम्पादक का पद छोड़ने के बाद तेजपाल ने ऑनलाइन पत्रिका की शुरुआत की और इसे 2001 में तब राष्ट्रव्यापी ख्याति मिली जब इसने ऑपरेशन वेस्ट-एंड का खुलासा किया था। अपने इस खुलासे में तहलका ने दर्शाया था कि रक्षा सौदों में रक्षा मंत्रालय के अधिकारी रिश्वत लेते हैं। तहलका खुलासे में ही यह भी पता चला था कि बराक मिसाइल घोटाले में रिश्वत खाई गई थी। वर्ष 2007 में पोर्टल एक साप्ताहिक पत्रिका में बदल गया और इसका हिंदी समाचार पोर्टल भी शुरू हुआ। इससे पहले इसने बहुत सारे सनसनीखेज खुलासे कर दिए थे।
मार्च 2000 ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया जिसमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज प्रभाकर को यह कहते हुए दिखाया गया था कि भारतीय क्रिकेट मैचों में मैच फिक्सिंग होती है। इस मैच फिक्सिंग की जांच सीबीआई ने की थी और इसमें मोहम्मद अजरुद्दीन, अजय जाडेजा, अजय शर्मा, मनोज प्रभाकर को बीसीसीआई ने दंडित किया था। इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद जड़ेजा और अजहरुद्दीन का क्रिकेट कैरियर पूरी तरह खत्म हो गया।
क्या था तहकला स्टिंग
वर्ष 2001 में तहलका ने अपने पहले बड़े स्टिंग ऑपरेशन ऑपरेशन वेस्ट एंड उजागर किया। इस ऑपरेशन के दौरान वीडियोज में कई रक्षा अधिकारी और तत्कालीन सरकार के नेता रिश्वत के बारे में बात करते और इसे लेते हुए दिखे थे। इसे दर्शाने के लिए पत्रकार ब्रिटिश हथियार कंपनी वेस्ट एंड के प्रतिनिधियों के तौर पर समता पार्टी की नेता जया जेटली, पूर्व नेवल ऑफीसर लेफ्टीनेंट कमोडोर सुरेश नंदा़ से बात करते दिखे तो उन्होंने भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को पार्टी चंदे के नाम पर रिश्वत दी थी।
इस मामले के उजागर होने के बाद तत्कालीन रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडीज ने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन बाद में उन्हें फिर मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया था। मामले के चार वर्ष बाद सीबीआई ने जेटली, बंगारू लक्ष्मण और अन्य के खिलाफ मामला दायर किया था। इस मामले में बंगारू लक्ष्मण को कोर्ट ने चार वर्ष की जेल की सजा भी सुनाई थी।
तहलका ने 2007 में एक और स्टिंग ऑपरेशन किया था जिसमें गुजरात के वीडियो फुटेज प्रदर्शित किए थे। इनमें बजरंग दल और विहिप के कार्यकर्ताओं ने खुलेआम स्वीकार किया था कि वे गुजरात दंगों में पूरी तरह से लिप्त थे। इन लोगों ने माना था कि वे नरोदा पाटिया में दंगा करने के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन, इस मामले के विशेष जांच दल को इसके दावों के पुख्ता सबूत नहीं मिल सके थे और अन्य मामले कोर्ट में लाए गए थे जिनमें वांछित कार्रवाई की गई।
जेसिका मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण था स्टिंग
जेसिका लाल हत्याकांड मामले में भी तहलका ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। इस मामले के एकमात्र गवाह शायन मुंशी का स्टिंग ऑपरेशन कर अदालत में यह साबित किया कि मुंशी झूठ बोल रहा है और उसे अच्छी तरह हिन्दी आती है।
तहलका का अगला खुलासा डीएमके नेता और तत्कालीन टेक्सटाइल मंत्री दयानिधि मारन के खिलाफ था और इस खुलासे में बताया गया था कि मारन 700 करोड़ के टेलिकॉम घोटाले में शामिल थे। इसे 2जी घोटाले के नाम से भी जाना जाता है। इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में हुई थी और सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में मारन को दोषी ठहराया था। इसके परिणामस्वरूप दयानिधि मारन को सरकार से इस्तीफा देना पड़ा था।
पत्रिका से ऐसे ही अन्य बहुत से घोटालों के खुलासे की उम्मीद की जा सकती थी, लेकिन इसके संस्थापक के इस अपराध में कथित तौर पर लिप्त पाए जाने की खबर से पत्रकारिता को एक झटका लगा है।
Multimedia Team, Naidunia.com
