Sunday, August 29, 2010

भावनाओं के समंदर में गोते लगाती आशाएं


कलाकार : जॉन अब्राहम, सोनल सहगल, श्रेयस तलपड़े, अनायता नायर, प्रतीक्षा लोंकर, गिरीश कर्नाड, फरीदा जलाल
म्यूजिक : मोहित चौहान, प्रीतम, शिराज उप्पल
डायरेक्टर : नागेश कुकुनूर
प्रोड्यूसर : परसेप्ट पिक्चर लिमिटेड।

जिंदगी को जुआ समझने वाले किसी इंसान को जब यह पता चले कि उसके पास अब बहुत कम समय बचा है, तब उसे कैसा लगता होगा। इसे ही नागेश ने अपनी फिल्म के माध्यम से दिखाने की कोशिश की है। फिल्म में काम कर रहे कलाकारों ने इंसानी जज्बातों को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाया है।

आशाएं का सार यह है कि राहुल सिंह(जॉन अब्राहम) जिंदगी को जुआ समझता है और उसकी प्रेमिका नफीसा (सोनल सहगल) उसे समझाती है कि यह सही नहीं है लेकिन वह नहीं मानता और अपनी व प्रेमिका की पूरी जिंदगी की जमा पूंजी को दांव पर लगा देता है। उसका यह दांव चल भी जाता है और एक ही झटके में वह तीन करोड़ का मालिक बन जाता है।
फिल्म में ट्विस्ट तब आता है जब सगाई की पार्टी के दौरान राहुल बेहोश हो जाता है और पता चलता है कि उसे लंग कैंसर है। कैंसर से पीड़ित होने के बाद राहुल निराश होकर घर छोड़कर एक ऐसी जगह पहुंचता है, जहां विभिन्न असाध्य रोगों से ग्रसित लोग मौत का इंतजार कर रहे हैं। यहां आने के बाद राहुल की जिंदगी ही बदल जाती है और इसके आगे की कहानी जानने के लिए आप पूरी फिल्म देख सकते हैं।

यह फिल्म भी काफी पहले ही बन गई थी लेकिन निर्माता व वितरक कंपनी के बीच मतभेद के कारण इसका प्रदर्शन टलता रहा। इस फि ल्म का अगर किसी को इंतजार था तो वे नाम थे अनायता नायर व सोनल सहगल। आपको अगर ध्यान हो तो अनायता को आपने शाहरूख खान की फिल्म चक दे इंडिया में देखा होगा। वैसे एक खास बात यह भी है कि आशाएं उनकी पहली फिल्म थी लेकिन कुछ कारणों से यह उनकी दूसरी फिल्म बन गई। फिल्म का तकनीकी पक्ष मजबूत है।

अगर अभिनय की बात की जाए तो जॉन ने अपने भावहीन अभिनेता होने के ठप्पे से निकलने की पूरी कोशिश की है। वहीं फिल्म में पद्मा का किरदार निभाने वाली अनायता नायर ने दमदार अभिनय किया है। जॉन व अनायता के बीच की केमिस्ट्री भी रंग जमाने में कामयाब रही है। वहीं सोनल सहगल पूरी तरह से शो-पीस बनकर रह गईं हैं। हां, गिरीश कर्नाड व फरीदा जलाल ने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करने की कोशिश की है। फिल्म में एक गंभीर विषय को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाया गया है।

सिस्टर ग्रेस के किरदार में प्रतीक्षा लोंकर का अभिनय भी औसत रहा है। श्रेयस ने नागेश का सम्मान करते हुए इस फिल्म में अतिथि कलाकार की भूमिका स्वीकार कर ली है लेकिन उनके खाते में करने के लिए कुछ भी नहीं था। फिल्म में कई खूबसूरत दृश्य हैं जिसके लिए कैमरामैन को इसका श्रेय देना चाहिए।

- मनीष कुमार