
फिल्म: गुजारिश
कलाकार: रितिक रोशन, ऐश्वर्या राय बच्चन, शेरनाज पटेल, आदित्य रॉय कपूर, रजित कपूर, नफीसा अली, सुहेल सेठ, मोनिकांगना दत्ता
रेटिंग: ***1/2
डायरेक्टर: संजय लीला भंसाली
प्रोडच्यूसर: एसएलबी फिल्म्स, यूटीवी मोशन पिक्चर्स
म्यूजिक डायरेक्टर: संजय लीला भंसाली
विवादों के साथ ही फिल्म गुजारिश से एक बार फिर संजय लीला भंसाली लोगों के सामने आए हैं। उनकी पिछली फिल्म सांवरिया के पिटने के बाद वे अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पाने के लिए काफी बेताब हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कई पुरस्कार जीत चुकी भंसाली की ब्लैक की तरह यह फिल्म भी क्या वैसा ही इतिहास दोहरा पाएगी। या एक बार फिर यह फिल्म भी सांवरिया की तरह पिट जाएगी। भंसाली इस फिल्म से साबित करना चाहेंगे कि वे अभी चूके नहीं हैं। फिल्म ब्लैक में उन्होंने जिस तरह से रानी मुखर्जी व अमिताभ बच्चन से किरदार को जीवंत करवा दिया था, ठीक उसी तरह की रितिक व ऐश्वर्या राय बच्चन से उन्होंने किरदारों को बिल्कुल दर्शकों से रूबरू करवाया है।
फिल्म में इच्छामृत्यु को लेकर सवाल उठाए गए हैं। भारत में भी इच्छामृत्यु की याचिकाएं दायर की गईं जिनमें कई को खारिज कर दिया गया है अथवा मामले अदालत में लंबित हैं। इस फिल्म के द्वारा इस विषय को उठाए जाने पर एक बार फिर से मुद्दा चर्चाओं में आ सकता है। बहरहाल फिल्म की कहानी है एक मशहूर जादूगर इथेन मस्करहंस (रितिक रोशन) की। जिसे एक शो के दौरान हुए हादसे में चोट लग जाती है और वह पैराप्लेजिया का शिकार हो जाता है। उसकी देखभाल सोफिया (ऐश्वर्या राय बच्चन) करती है। पूरी फिल्म इच्छामृत्यु के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है। और अंतत: जीत जिंदगी को खुलकर जीने वाले की ही होती है।
नफीसा अली ने इथेन की मां को परदे पर जीया है तो वहीं सुहेल सेठ ने डॉक्टर के किरदार में खूब रंग जमाया है। एक वकील व दोस्त के रूप में शेरनाज पटेल ने काफी अच्छा अभिनय किया है। सरकारी वकील की भूमिका में रजित कपूर ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। वहीं इस फिल्म के जरिए मोनिकांगना दत्ता व फिल्म एक्शन रिप्ले से बॉलीवुड में प्रवेश करने वाले आदित्य रॉय कपूर ने भी ठीक-ठाक अभिनय किया है।
फिल्म में गीत-संगीत को फिल्म के मूड के हिसाब से ही रचा गया है। वैसे इसके कई गाने पहले ही लोगों के होंठों पर आ गए हैं। फिल्म की खास बात यह है कि संगीत संजय लीला भंसाली ने खुद ही दी है। इसके तकनीकी पक्ष के बारे में बात न की जाए तो इस फिल्म के तकनिशियनों के साथ नाइंसाफी होगी। इसकी एडिटिंग काफी जबरदस्त है और पूरी फिल्म के दौरान यह दर्शकों को बांधे रखती है। फिल्म का कैमरा वर्क देखकर लगता है जैसे कैनवास पर एक चित्र उकेरा गया है।
समीक्षक: मनीष कुमार