Sunday, October 4, 2015

इंदौर डायरी - 12

आज सुबह से ही उसका मन उदास था। रह-रह कर उसे कुछ अंदर से साल रहा था। क्या, उसे पता तो था लेकिन शायद वह जमाने के सामने जाहिर नहीं करना चाहता था। उसने बहुत सोचने के बाद मोबाइल उठाया और सर्च ऑप्शन में टाइप करने लगा। स्क्रीन पर उसका नाम चमकने लगा था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि कॉल बटन को क्लिक कर पाए। तभी अचानक मोबाइल पर दिखने लगा ..... कॉलिंग। उसके लिए अजीब स्थिति हो गई। सोचने लगा कॉल रिसीव करूं या काट दूं। इस बीच मोबाइल की घंटी आठ-नौ बार बज चुकी थी। जैसे ही दसवीं घंटी बजी उसने कॉल रिसीव कर लिया। उधर से आवाज आई, 'कैसे हो?' उसने जवाब दिया, 'ठीक हूं।' उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन, उसने फिर भी यह बोला था। उधर से आवाज आई, 'एक बात पूछुंगी तो बताओगे।' उसने कहा, 'हां, पूछो ना। क्या पूछना है।' 'तुम शादी क्यों नहीं कर रहे हो? मेरे लिए कब तक इंतजार करोगे? तुम्हारे चक्कर में घरवाले मुझे भला-बुरा बोल रहे होंगे।' इसके साथ ही उधर से रोने की आवाज आने लगी और अगले ही पल कॉल काट दिया गया। वह यही सोच रहा था कि आज भी मैं उसके सवाल का जवाब नहीं दे सका।
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 12

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