Tuesday, September 29, 2015

इंदौर डायरी - 9

वह सुबह 6:30 बजे नींद से जागा ही था। उसने अपना मोबाइल देखा। उसमें एक अनजान नंबर से मैसेज आया हुआ था 'आई मिस यू।' उसने देखा औऱ सोच में पड़ गया कि आखिर यह मैसेज भेजा किसने होगा। उसने पलटकर उस नंबर पर रिंग किया। दूसरी तरफ से फोन उठा, लेकिन कोई आवाज नहीं आ रही थी, सिवाय कमरे में चल रहे पंखे के अलावा। उसने कई बार हैलो-हैलो किया, लेकिन फिर भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बावजूद भी उसने फोन नहीं काटा और उस सन्नाटे को सुनता रहा। आखिरकार 6:37 मिनट में दूसरी तरफ से फोन काट दिया गया और वह एक बार फिर अकेला रह गया अपने कमरे में। 
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 9

Monday, September 28, 2015

इंदौर डायरी - 8

देर शाम हो चुकी थी। कमरे के बाहर तेज बारिश की आवाज उसके कानों में पड़ रही थी, लेकिन मन में चार साल पहले का दृश्य घूम रहा था और आंखों के कोनों से आंसू टपकने ही वाले थे। तभी उसने कमरे का दरवाजा खोला और बाहर हो रही बारिश में खुद को भिंगोने लगा। इस बारिश के पानी में उसके आंसू भी घुल गए। उसके बाजू के कमरे में रहने वाले लड़के ने पूछा, भैया आपको भी बारिश में भींगना अच्छा लगता है क्या? उसने उसके सवाल को टालते हुए कहा, बारिश का मजा लो।
‪#‎इंदौरडायरी‬- 8

Sunday, September 27, 2015

इंदौर डायरी - 7

बहुत याद आ रही थी वो। उसने इस कारण ही उसको सुबह के 10 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक ढेरों व्हाट्सऐप मैसेज कर दिए, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। आंखों में आंसू के साथ वह बिस्तर पर लेटा हुआ था। नींद आंखों से कोसों दूर थी। अचानक रात के 1.35 बजे उसके मोबाइल पर एक व्हाट्सऐप मैसेज आया। मैसेज पढ़कर उसने अपना मुंह तकिये में दबा लिया ताकि रोने की आवाज कमरे से बाहर न जाए।
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 7

Friday, September 25, 2015

इंदौर डायरी - 6

आज फिर उसका मोबाइल शांत पड़ा था। कोई मैसेज या कॉल नहीं। अचानक रात के 10 बजे उसका मोबाइल घनघनाया। उसने देखा तो एक अनजान नंबर से कॉल था। उसने कॉल नहीं उठाने का फैसला किया और सोचा गलत नंबर होगा और दो-तीन बार बजकर बंद हो जाएगा। लेकिन, वह लगातार 10-12 बार बजकर बंद हुआ और फिर से बजने लगा। अंततः उसने थक-हारकर कॉल रिसीव किया। उधर से किसी के रोने की आवाज आ रही थी। उसे समझते देर नहीं लगी कि कॉल किसका था।
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 6

Thursday, September 24, 2015

इंदौर डायरी - 5

तीन दिन बाद उसके मोबाइल पर एक नोटिफिकेशन वाला रिंगटोन बजा। उसने अनमने ढंग से देखने के लिए मोबाइल उठाया। देखते ही उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जिस कारण वह बीते दिनों उदास था, वह दूर हो गया था। उसकी बर्थडे विश का उसने जवाब दिया था - थैक्स। साथ ही उसका हालचाल भी पूछा था। इतना काफी था उसके खुश होने के लिए। 
‪#‎इंदौरडायरी‬- 5

Wednesday, September 23, 2015

इंदौर डायरी - 4

आज 'उसका' बर्थडे था। उसने उसे व्हाट्सऐप, फेसबुक और अन्य सोशल साइट्स पर बर्थडे की बधाई भी भेज दी थी, लेकिन फिर भी वह खुश नहीं था। कारण यह था कि वह उससे खुद फोन पर विश नहीं कर रहा था। सबकुछ आभासी दुनिया में कर रहा था, वह उसे खुद से विश करना चाहता था और उसका रिएक्शन जानना चाहता था।
‪#‎इंदौरडायरी‬ 4

Tuesday, September 22, 2015

इंदौर डायरी-3

आज उसके ऑफिस की छुट्टी थी। वह बाहर जाकर घूमने का प्लान बना ही रहा था कि अचानक उसके मोबाइल में नोटिफिकेशन वाली आवाज गूंजी। उसने देखा कि उसके फेसबुक पेज पर चार दिन पहले लिखे गए एक पोस्ट को उसने लाइक किया है। उसने बाहर जाने का प्लान बनाना छोड़ दिया और अपने मोबाइल को हर दस मिनट बाद चेक करने लगा।
‪#‎इंदौरडायरी‬ 3

Monday, September 21, 2015

इंदौर डायरी‬-2

रात में अचानक वह उठकर बिस्तर पर बैठ गया। उसे लगा जैसे सिरहाने में पडा उसका मोबाइल फोन घनघना रहा है। उसने देखा, लेकिन उसकी लाइट नहीं जल रही थी। फिर भी उसने मोबाइल की कॉल लिस्ट देखी कि कहीं मिस्ड कॉल में उसका नंबर तो नहीं है। आखिर उसकी आदत जो थी देर रात में उससे बात करने की।
#‎इंदौरडायरी‬-2

Sunday, September 20, 2015

‪इंदौर डायरी‬-1

वह अंदर अपने कमरे में बिस्तर पर लेटा हुआ था। बाहर अचानक जोरों की बारिश होने लगी। उसके कमरे में कोई खिड़की नहीं थी, लेकिन फिर भी उसे पता चल चुका था कि बाहर बारिश हो रही है। इसका पता उसे छत पर लगे टीनशेड पर पड़ने वाली बारिश की बूंदों के चोट से होने वाली आवाज से चल रहा था। अंदर ही अंदर वह सोच रहा था काश कोई उसके दिल में लगातार चोट कर रही बातों का हाल जान पाता।
‪#‎इंदौरडायरी‬-1