Sunday, September 27, 2015

इंदौर डायरी - 7

बहुत याद आ रही थी वो। उसने इस कारण ही उसको सुबह के 10 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक ढेरों व्हाट्सऐप मैसेज कर दिए, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। आंखों में आंसू के साथ वह बिस्तर पर लेटा हुआ था। नींद आंखों से कोसों दूर थी। अचानक रात के 1.35 बजे उसके मोबाइल पर एक व्हाट्सऐप मैसेज आया। मैसेज पढ़कर उसने अपना मुंह तकिये में दबा लिया ताकि रोने की आवाज कमरे से बाहर न जाए।
‪#‎इंदौरडायरी‬ - 7

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