Saturday, February 27, 2010

तीन दोस्त

हम तीन बीजउगने के लिए पड़े हैं हर चौराहे परजाने कब वर्षा हो कब अंकुर फूट पड़े,हम तीन दोस्त घुटते हैं केवल इसीलिएइस ऊब घुटन से जाने कब सुर फूट पड़े।

रचनाकार: दुष्यंत कुमार

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