Saturday, February 27, 2010

बतूता का जूता

इब्नबतूता पहन के जूतानिकल पड़े तूफान मेंथोड़ी हवा नाक में घुस गईघुस गई थोड़ी कान में

कभी नाक को, कभी कान कोमलते इब्नबतूताइसी बीच में निकल पड़ाउनके पैरों का जूता

उड़ते उड़ते जूता उनकाजा पहुँचा जापान मेंइब्नबतूता खड़े रह गयेमोची की दुकान में।

रचनाकार: सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

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